कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 19, 2007

ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात


ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात
नवा-ए-मीर सुनाओ बड़ी उदास है रात

नवा-ए-दर्द में इक ज़िंदगी तो होती है
नवा-ए-दर्द सुनाओ बड़ी उदास है रात

उदासियों के जो हमराज़-ओ-हमनफ़स थे कभी
उन्हें ना दिल से भुलाओ बड़ी उदास है रात

जो हो सके तो इधर की राह भूल पड़ो
सनमक़दे की हवाओं बड़ी उदास है रात

कहें न तुमसे तो फ़िर और किससे जाके कहें
सियाह ज़ुल्फ़ के सायों बड़ी उदास है रात

अभी तो ज़िक्र-ए-सहर दोस्तों है दूर की बात
अभी तो देखते जाओ बड़ी उदास है रात

दिये रहो यूं ही कुछ देर और हाथ में हाथ
अभी ना पास से जाओ बड़ी उदास है रात

सुना है पहले भी ऐसे में बुझ गये हैं चिराग़
दिलों की ख़ैर मनाओ बड़ी उदास है रात

समेट लो कि बड़े काम की है दौलत-ए-ग़म
इसे यूं ही न गंवाओ बड़ी उदास है रात

इसी खंडहर में कहीं कुछ दिये हैं टूटे हुए
इन्ही से काम चलाओ बड़ी उदास है रात

दोआतिशां न बना दे उसे नवा-ए-‘फ़िराक़’
ये साज़-ए-ग़म न सुनाओ बड़ी उदास है रात

Unsung lines in Bold Italic

Lyrics: Firaq Gorakhpuri
Singer: Jagjit Singh

5 टिप्पणियाँ »

  1. Hi Amarjeet,

    Wornderful ghazals you have provided here..
    This is so precious for any ghazal lover..
    Could you please provide narration as well for these ghazals..
    These ghazals are quite difficult to undersrtand..
    If u can explain their meanings, then it;ll be great

    thanx in advance,
    Rajesh

    टिप्पणी द्वारा Rajesh — मार्च 20, 2008 @ 1:30 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  2. अभी तो ज़िक्र-ए-सहर दोस्तों है दूर की बात
    अभी तो देखते जाओ बड़ी उदास है रात

    thanks !

    टिप्पणी द्वारा nishant — मार्च 24, 2008 @ 6:14 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  3. Hi Amarjeet,

    Really really great, praise worthy, great gift for a ghazal lover, and that too of Jagjit Singh. Keep in touch.

    Thanx for beautiful Ghazals.

    टिप्पणी द्वारा Sadiq Iqbal — मई 31, 2008 @ 11:47 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  4. Plz mail me these Ghazals if possible…

    टिप्पणी द्वारा Sadiq Iqbal — मई 31, 2008 @ 11:52 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  5. Umar Jalwoon mein basar ho yeh zaroori to nahi, har shabe-e-gham ki saher ho yeh zaroori to nahi.
    Neend to dard ke bistar pe bhi a sakti hai un ki aagosh mein sar ho yeh zaroori to nahi.

    टिप्पणी द्वारा Sadiq Iqbal — जून 1, 2008 @ 12:02 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया


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