कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

मई 12, 2012

ना मुहब्बत ना दोस्ती के लिए


ना मुहब्बत ना दोस्ती के लिए,
वक़्त रुकता नहीं किसी के लिए,

दिल को अपने सज़ा न दे यूं ही,
सोच ले आज दो घडी के लिए,

हर कोई प्यार ढूढता है यहाँ,
अपनी तन्हा सी ज़िंदगी के लिए,

वक़्त के साथ साथ चलता रहे,
यही बेहतर है आदमी के लिए..

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