कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

मार्च 21, 2008

तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे


तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे,
जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा,
जिनको इक उम्र कलेजे से लगाए रखा,

जिनका हर लफ्ज़ मुझे याद था पानी की तरह,
याद थे मुझको जो पैगाम-ऐ-जुबानी की तरह,
मुझ को प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह,

तूने दुनिया की निगाहों से जो बचाकर लिखे,
सालाहा-साल मेरे नाम बराबर लिखे,
कभी दिन में तो कभी रात में उठकर लिखे,

तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे,
प्यार मे डूबे हुए ख़त मैं जलाता कैसे,
तेरे हाथों के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे,

तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ,
आग बहते हुए पानी में लगा आया हूँ,

Singer: Jagjit Singh

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नवम्बर 15, 2007

झुकी झुकी सी नज़र बेकरार है के नही


झुकी झुकी सी नज़र बेकरार है के नही,
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है के नही,

तू अपने दिल की जवाँ धडकनों को गिन के बता,
मेरी तरह तेरा दिल बेकरार है के नही,

वो पल के जिस में मोहब्बत जवाँ होती है,
उस एक पल का तुझे इंतज़ार है के नही,

तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा हूँ दुनिया को,
तुझे भी अपने पे ये ऐतबार है के नही,

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो


तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो,
क्या गम है जिसको छुपा रहे हो,

आंखो में नमी हँसी लबो पर,
क्या हाल है क्या दिखा रहे हो,

बन जायेंगे ज़हर पीते पीते,
ये अश्क जो पीते रहे हो,

जिन ज़ख्मों को वक्त भर चला है,
तुम क्यूं उन्हें छेड़े जा रहे हो,

रेखाओं का खेल है मुक्क़द्दर,
रेखाओं से मात खा रहे हो,

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