कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 1, 2007

आप को देख कर देखता रह गया


आप को देख कर देखता रह गया,
क्या कहुँ और कहने को क्या रह गया,

आते आते मेरा नाम सा रह गया,
उसके होठों पे कुछ कांपता रह गया,

वो मेरे सामने ही गया और मैं,
रास्ते की त्तरह देखता रह गया,

झूठ वाले कहीं से कहीं बढ गये,
और मैं था के सच बोलता रह गया,

आंधियों के इरादे तो अच्छे ना थे,
ये दिया कैसे जलता रह गया,

Lyrics: Waseem Barelvi
Singer: Jagjit Singh

Advertisements

तेरे कदमो पे सर होगा


तेरे कदमो पे सर होगा, कजा सर पे खडी होगी,
फिर उस सजदे का क्या कहना अनोखी बन्दगी होगी,

नसीम-ए-सुबह गुनशन में गुलो से खेलती होगी,
किसी की आखरी हिच्चकी किसी की दिल्ल्गी होगी,

दिखा दुँगा सर-ए-महफिल, बता दुँगा सर-ए-महशिल,
वो मेरे दिल में होगें और दुनिया देखती होगी,

मजा आ जायेगा महफ़िल में फ़िर सुनने सुनाने का,
जुबान होगी वहाँ मेरी कहानी आप की होगी,

तुम्हे दानिश्ता महफ़िल में जो देखा हो तो मुजरिम,
नजर आखिर नजर है बेइरादा उठ गई होगी,

Lyrics: Seemab Akbarabadi
Singer: Jagjit Singh

मैं नशे मे हुँ


ठुकराओ अब के प्यार करो, मैं नशे मे हुँ,
जो चाहे मेरे यार करो, मैं नशे मे हुँ,

अभी दिला रहा हुँ यकीन-ए-वफ़ा मगर,
मेरा ना एतबार करो, मैं नशे मे हुँ,

गिरने दो तुम मुझे मेरा सागर सम्भाल लो,
इतना तो मेरे यार करो, मैं नशे मे हुँ,

मुझको कदम कदम पे भटकने दो आज दोस्त,
तुम अपना करोबार करो, मैं नशे मे हुँ,

फ़िर बेखुदी में हद से गुजर ने लगा हुँ मैं,
इतना ना मुझ से प्यार करो ,मैं नशे मे हुँ,

Lyrics: Shahid Kabir
Singer: Jagjit Singh

मैनु तेरा शबाब ले बैठा


मैनु तेरा शबाब ले बैठा,
रगं गौरा गुलाब ले बैठा,

किन्नी- बीती ते किन्नी बाकी है,
मैनु एहो हिसाब ले बैठा,

मैनु जद वी तूसी तो याद आये,
दिन दिहादे शराब ले बैठा,

चन्गा हुन्दा सवाल ना करदा,
मैनु तेरा जवाब ले बैठा,

Lyrics: Shiv Kumar Batalvi
Singer: Jagjit Singh

इश्क की दास्तान है प्यारे


इश्क की दास्तान है प्यारे,
अपनी अपनी जुबान है प्यारे,

हम जमाने से इन्तकाम तो ले,
एक हसीं दरम्यान है प्यारे,

तू नहीं मैं हुँ, मैं नहीं तू है,
अब कुछ ऎसा गुमान है प्यारे,

रख कदम फुंक-फूक कर नादां,
जर्रे – जर्रे में जान है प्यारे,

Lyrics: Jigar Moradabadi
Singer: Jagjit Singh

चांद के साथ कई दर्द पुराने निकले


चांद के साथ कई दर्द पुराने निकले,
कितने गम थे जो तेरे गम के बहाने निकले,

फ़सल-ए-गुल आई फ़िर एक बार असीनाने-वफ़ा,
अपने ही खून के दरिया में नहाने निकले,

दिल ने एक ईंट से तामीर किया हसीं ताजमहल,
तुने एक बात कही लाख फसाने निकले,

दश्त-ए-तन्हाई ये हिजरा में खडा सोचता हुँ,
हाय क्या लोग मेरा साथ निभाने निकले,

Lyrics: Amjad Islam Amjad
Singer: Jagjit Singh

वर्डप्रेस (WordPress.com) पर एक स्वतंत्र वेबसाइट या ब्लॉग बनाएँ .