कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 21, 2007

रातें थी सूनी सूनी


रातें थी सूनी सूनी, दिन भी उदास थे मेरे,
तुम मिल गए तो जागे सोये हुए सवेरे,
खामोश इन लबो को एक रागिनी मिली है,
मुरझाये से गुलो को एक ताजगी मिली है,
घेरे हुए थे मुझ को कब से घने अंधेरे,
रूठा हुआ था मुझसे, खुशियों को है तराना,
लगता था जिंदगानी, बन जायेगी फ़साना,
हर सु लगे हुए थे तन्हाइयो के फेरे,

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सर ही न झुका


सर ही न झुका, दिल भी तो झुका,
कल्याण यंही होगा, निर्वाण यही होगा,

इन दीवारों से बातें कर,
मत छलका तू मन का सागर,

जीवन में यह सन्नाटा भर,
फिर कान लगा, कल्याण यंही होगा,

Singer: Jagjit Singh

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