कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अप्रैल 7, 2008

मिलकर जुदा हुए तो


मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम,
एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम,

आंसू छलक छलक के सतायेंगे रात भर,
मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम,

जब दूरियों की याद दिलों को जलायेगी,
जिस्मों को चांदनी में भिगोया करेंगे हम,

गर दे गया दगा हमें तूफ़ान भी ‘क़तील’,
साहिल पे कश्तियों को डुबोया करेंगे हम,

Singer: Jagjit Singh, Chitra Singh

मार्च 21, 2008

तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे


तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे,
जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा,
जिनको इक उम्र कलेजे से लगाए रखा,

जिनका हर लफ्ज़ मुझे याद था पानी की तरह,
याद थे मुझको जो पैगाम-ऐ-जुबानी की तरह,
मुझ को प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह,

तूने दुनिया की निगाहों से जो बचाकर लिखे,
सालाहा-साल मेरे नाम बराबर लिखे,
कभी दिन में तो कभी रात में उठकर लिखे,

तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे,
प्यार मे डूबे हुए ख़त मैं जलाता कैसे,
तेरे हाथों के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे,

तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ,
आग बहते हुए पानी में लगा आया हूँ,

Singer: Jagjit Singh

अक्टूबर 16, 2006

अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको

Filed under: A Mile Stone,Albums,Jagjit Singh — Amarjeet Singh @ 6:21 अपराह्न
Tags: , , , ,

अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको
मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना ले मुझको।

( नसीब : destiny)

मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने
ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको।

( वफ़ा : fidelity, loyalty; सादा-दिली : simplicity)

ख़ुद को मैं बाँट ना डालूँ कहीं दामन-दामन
कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको।

(दामन-दामन : in tatters)

वादा फिर वादा है मैं ज़हर भी पी जाऊँ ‘क़तील’
शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको।

(वादा : promise)

परेशाँ रात सारी है, सितारों तुम तो सो जाओ

Filed under: A Mile Stone,Albums,Jagjit Singh — Amarjeet Singh @ 6:20 अपराह्न
Tags: , , , ,

परेशाँ रात सारी है, सितारों तुम तो सो जाओ
सुकूते मर्ग तारी है, सितारों तुम तो सो जाओ

(परेशाँ : disordered, troubled; सुकूते मर्ग : silence before death; तारी : prevalent)

हमें तो आज की शब पौ फटे तक जागना होगा
यही किस्मत हमारी है, सितारों तुम तो सो जाओ

(शब : night; पौ फटे : till dawn)

हमें भी नींद आ जाएगी, हम भी सो जाऐंगे
अभी कुछ बेक़रारी है, सितारों तुम तो सो जाओ

(बेक़रारी : restlessness)

ये मोजेज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाये मुझे


ये मोजेज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाये मुझे
के सँग तुझपे गिरे और ज़ख्म आये मुझे

(मोजेज़ा : miracle; सँग: stone; ज़ख्म : wound)

वो मेहरबाँ है तो इक़रार क्यूँ नहीं करता
वो बद-गुमाँ है तो सौ बार आज़माये मुझे

(मेहरबाँ : benign; इक़रार : accept; बद-गुमाँ : doubtful; आज़माये : test)

वो मेरा दोस्त है सारे जहाँन को मालूम
दग़ा करे वो किसी से तो शर्म आये मुझे

(जहाँन : world; दग़ा : fraud; शर्म : shame)

मैं अपनी ज़ात में नीलाम हो रहा हूँ ‘क़तील’
ग़मे हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे

(ज़ात : self, soul, being; ग़मे हयात : sufferings of the life)

दिल को ग़मे हयात गवारा है इन दिनों

Filed under: A Mile Stone,Albums,Jagjit Singh — Amarjeet Singh @ 6:18 अपराह्न
Tags: , , , ,

दिल को ग़मे हयात गवारा है इन दिनों
पहले जो दर्द था वही चारा है इन दिनों

(ग़मे हयात : sufferings of life; चारा : cure, remedy)

ये दिल, ज़रा सा दिल तेरी यादों में खो गया है
ज़र्रे को आँन्धियों का सहारा है इन दिनों

(ज़र्रा : dust particle)

तुम आ ना सको तो शब को बढ़ा दूँ कुछ और भी
अपने कहे में सुब्ह का तारा है इन दिनों

(शब : night)

तुम्हारी अन्जुमन से उठ के दीवाने कहाँ जात


तुम्हारी अन्जुमन से उठ के दीवाने कहाँ जाते
जो वाबिस्ता हुये तुम से वो अफसाने कहाँ जाते

(अन्जुमन : gathering, assembly; वाबिस्ता : attached)

निकल करा दैरो काबा से अगर मिलता ना मैख़ाना
तो ठुकराये हुये इन्सान ख़ुदा जाने कहाँ जाते

(दैरो काबा : temple and the mosque; मैख़ाना : wine-house, tavern)

तुम्हारी बेरुख़ी ने लाज रख ली बादा-ख़ाने की
तुम आँखों से पिला देते तो पैमानें कहाँ जाते

(बेरुख़ी : rudeness; बादा-ख़ाने : wine-houese, tavern; पैमानें : glasses of wine)

चलो अच्छा हुआ काम आ गयी दीवानग़ी अपनी
वगरना हम जमाने भर को समझाने कहाँ जाते

(वगरना : otherwise)

सदमा तो है मुझे भी के तुझसे जुदा हूँ मैं

Filed under: A Mile Stone,Albums,Jagjit Singh — Amarjeet Singh @ 6:17 अपराह्न
Tags: , , , ,

सदमा तो है मुझे भी के तुझसे जुदा हूँ मैं
लेकिन ये सोचता हूँ के अब तेरा क्या हूँ मैं

(सदमा : shock; जुदा : separated)

बिखरा पड़ा है तेरे घर में तेरा वजूद
बेकार महफिलों में तुझे ढूँडता हूँ मैं

(वजूद : existence)

ना जाने किस अदा से लिया तूने मेरा नाम
दुनिया समझ रही है के सब कुछ तेरा हूँ मैं

(अदा : style)

ले मेरे तजुर्बों से सबक़ ऐ मेरे रक़ीब
दो-चार साल उम्र में तुझसे बड़ा हूँ मैं

(तजुर्बों से : from experiences; सबक़ : lesson; रक़ीब : rival in love)

अँगड़ाई पर अँगड़ाई लेती है रात जुदाई की

Filed under: A Mile Stone,Albums,Jagjit Singh — Amarjeet Singh @ 6:14 अपराह्न
Tags: , , , ,

अँगड़ाई पर अँगड़ाई लेती है रात जुदाई की
तुम क्या समझो तुम क्या जानों बात मेरी तन्हाई की

कौन सियाही घोल रहा था वक्त के बहते दरिया में
मैनें आँख झुकी देखी है आज किसी हरजाई की

(सियाही : ink; हरजाई : oppressor, tyrant)

वस्ल की रात ने जाने क्यूँ इसरार था उनको जाने पर
वक्त से पहले डूब गये, तारों ने बड़ी दानाई की

(वस्ल : meeting; इसरार : insistence; दानाई : wisdom, knowledge)

उड़ते उड़ते आस का पँछी दूर उफ़क़ में डूब गया
रोते रोते बैठ गयी आवाज़ किसी सौदाई की

(उफ़क़ : horizon; सौदाई : melancholic, madman)

WordPress.com पर ब्लॉग.