कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 22, 2007

उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी ना सकूं


उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी ना सकूं,
ढ़ूंढ़ने उस को चला हूँ जिसे पा भी ना सकूं,

ड़ाल कर ख़ाक मेरे ख़ून पे क़ातिल् ने कहा,
कुछ ये मेंहंदी नहीं मेरी के छुपा भी ना सकूं,

ज़ब्त कम्बख़्त ने और आके गला घोंटा है,
के उसे हाल सुनाऊं तो सुना भी ना सकूं,

उस के पहलू में जो ले जाके सुला दूं दिल को,
नींद ऐसी उसे आये के जगा भी ना सकूं,

Lyrics: Ameer Minai
Singer: Jagjit Singh

जब भी आती है तेरी याद


जब भी आती है तेरी याद कभी शाम के बाद,
और बढ़ जाती है अफ़्सुर्दादिली शाम के बाद,

अब इरादों पे भरोसा है ना तौबा पे यकीं,
मुझ को ले जाये कहां तशनालबी शाम के बाद,

यूँ तो हर लम्हा तेरी याद का बोझल गुज़रा,
दिल को महसूस हुई तेरी कमी शाम के बाद,

यूँ तो कुछ शाम से पहले भी उदासी थी ‘अदीब’,
अब तो कुछ और बढ़ी दिल की लगी शाम के बाद,

Lyrics: Krishan Adeeb
Singer: Jagjit Singh

इश्क़ फ़ना का नाम है


इश्क़ फ़ना का नाम है इश्क़ में ज़िंदगी न देख,
जल्वा-ए-आफ़ताब बन ज़र्रे में रोशनी न देख,

शौक़ को रहनुमा बन जो हो चुका कभी न देख,
आग दबी हुई निकाल आग बुझी हुई न देख,

तुझ को ख़ुदा का वास्ता तू मेरी ज़िंदगी न देख,
जिसकी सहर भी शाम हो उसकी सियाहशवी न देख,

Lyrics: Jigar Moradabadi
Singer: Chitra Singh

दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने


दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने,
क्यों है ऐसा उदास क्या जाने,

कह दिया मैने हाल-ए-दिल अपना,
इस को तुम जानो या ख़ुदा जाने,

जानते जानते ही जानेगा,
मुझ में क्या है अभी वो क्या जाने,

तुम ना पाओगे सादादिल मुझ सा,
जो तग़ाफ़ुल को भी हया जाने,

Lyrics: Daag Dehlvi
Singer: Jagjit Singh

बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना


बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना,
आदमी को भी मयस्सर नहीं इन्सां होना,

की मेरे क़त्ल के बाद उस ने जफ़ा से तौबा,
हाय उस जूदपशेमा का पशेमां होना,

हैफ़ उस चार गिरह कपड़े की क़िस्मत ‘ग़ालिब’,
जिस की क़िस्मत में हो आशिक़ का गरेबां होना,

Lyrics: Mirza Ghalib
Singer: Jagjit Singh, Chitra Singh

धुंआ उठा था दीवाने के जलते घर से


धुंआ उठा था दीवाने के जलते घर से सारी रात,
लेकिन वो ख़ामोश रहे दुनिया के ड़र से सारी रात,

रात यूँ जलते दिल पर तेरी यादों की बरासात हुई,
जैसे इक प्यासे की चिता पर बरखा बरसे सारी रात,

सारी रात तो सपने देखे सुबह को ये महसूस हुआ,
हम ने अपना सर टकराया इक पत्थर से सारी रात,

Lyrics: Shamim Shahabadi
Singer: Jagjit Singh

अपना ग़म भूल गये तेरी जफ़ा भूल गये


अपना ग़म भूल गये तेरी जफ़ा भूल गये,
हम तो हर बात मोहब्बत के सिवा भूल गये,

हम अकेले ही नहीं प्यार के दीवाने सनम,
आप भी नज़रें झुकाने की अदा भूल गये,

अब तो सोचा है के दामन ही तेरा थामेंगे,
हाथ जब हमने उठाये हैं दुआ भूल गये,

शुक्र समझो या इसे अपनी शिकायत समझो,
तुम ने वो दर्द दिया है के दवा भूल गये,

Lyrics: Farukh Kaiser
Singer: Jagjit Singh
Music: C K Chauhan 

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता


अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता,
कभी जान सदक़े होती कभी दिल निसार होता,

ना मज़ा है दुश्मनी में ना है लुत्फ़ दोस्ती में,
कोई ग़ैर ग़ैर होता कोई यार यार होता,

ये मज़ा था दिल्लगी का के बराबर आग लगती,
ना तुम्हे क़रार होता ना हमें क़रार होता,

तेरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते,
अगर अपनी ज़िंदगी का हमें ऐतबार होता,

Lyrics: Daag Dehlvi
Singer: Jagjit Singh

साक़िया होश कहाँ था


आँख को जाम समझ बैठा था अंजाने में,
साक़िया होश कहाँ था तेरे दीवाने में,

जाने किस बात की उनको है शिकायत मुझसे,
नाम तक जिनका नहीं है मेरे अफ़साने में,

दिल के टुकड़ों से तेरी याद की खुशबू ना गई,
बू-ए-मै बाकी है टूटे हुए पैमाने में,

दिल-ए-बरबाद में उम्मीद का आलम क्या है,
टिमटिमाती हुई इक शम्मा है वीराने में,

Lyrics: Shamim Shahabadi
Singer: Jagjit Singh
Music: C K Chauhan

नवम्बर 21, 2007

अब तो घबरा के ये कहते है के मर जायेंगे


अब तो घबरा के ये कहते हैं के मर जायेंगे,
मर के भी चैन ना पाया तो किधर जायेंगे,

लाये जो मस्त हैं तुरबत पे गुलाबी आँखें,
और अगर कुछ नहीं दो फूल तो धर जायेंगे,

हम नहीं वो जो करें खून का दावा तुझसे,
बल्क़ि पूछेगा ख़ुदा भी तो मुकर जायेंगे,

Lyrics: Ibrahim Zauq
Singer: Jagjit Singh

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