कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 1, 2007

तुमने दिल की बात कह दी


तुमने दिल की बात कह दी, आज ये अच्छा हुआ,
हम तुम्हें अपना समझते थे, बढा धोखा हुआ,

जब भी हमने कुछ कहा, उसका असर उल्टा हुआ,
आप शायद भूलते है, बारहा ऎसा हुआ,

आपकी आंखों में ये आंसू कहाँ से आ गये,
हम तो दिवाने है लेकिन आप को ये क्या हुआ,

अब किसी से क्या कहें इकबाल अपनी दास्तां,
बस खुदा का शुक्र है जो भी हुआ अच्छा हुआ,

Lyrics: Iqbaal Azim
Singer: Jagjit Singh

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तेरे बारें में जब सोचा नहीं था


तेरे बारें में जब सोचा नहीं था,
मैं तन्हा था मगर इतना नहीं था,

तेरी तस्वीर से करता था बातें,
मेरे कमरे में आईना नहीं था,

समन्दर ने मुझे प्यासा ही रखा,
मैं जब सहरा में था प्यासा नहीं था,

मनाने रुठने के खेल में,
बिछड जायेगे हम ये सोचा नहीं था,

सुना है बन्द करली उसने आँखे,
कई रातों से वो सोया नहीं था,

Lyrics: Meraz
Singer: Jagjit Singh

मुझे होश नहीं


मुझे होश नहीं, मुझे होश नहीं,
कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं,
रात के साथ गयी बात , मुझे होश नहीं,

मुझको ये भी नहीं मालुम के जाना है कहाँ,
थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं,

जाने क्या टुटा है पैमाना के दिल है मेरा,
बिखरे बिखरे है ख्यालात मुझे होश नहीं,

आंसुओं और शराबो मे गुजर है अब तो,
मैने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं,

Lyrics: Rahat Indori
Singer: Jagjit Singh

चराग-ए-इश्क जलाने की रात आयी है


चराग-ए-इश्क, जलाने की रात आयी है,
किसी को अपना बनाने की रात आयी है,

वो आज आये है महफ़िल में चांदनी लेकर,
के रोशनी में नहाने की रात आयी है,

फ़लक का चांद भी शर्मा के मुँह छुपायेगा,
नकाब रुख से उठा ने की रात आयी है,

निगाहें साकी से पेहम के छलक रही है शराब,
पियो के पीने पीलाने की रात आयी है,

Lyrics: Faiz Ratlami
Singer: Jagjit Singh

सितम्बर 27, 2007

मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो


मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो,
मेरी तरह तुम भी झूठे हो,

इक टहनी पर चाँद टिका था,
मैंने ये समझा तुम बैठे हो,

उजले उजले फूल खिले थे,
बिल्कुल जैसे तुम हँसते हो,

मुझ को शाम बता देती है,
तुम कैसे कपड़े पहने हो,

तुम तन्हा दुनिया से लडोगे,
बच्चों सी बातें करते हो,

Lyrics: Dr. Bashir Badr
Singer: Jagjit Singh

तेरे आने की जब ख़बर महके


तेरे आने की जब ख़बर महके,
तेरे खुश्बू से सारा घर महके,

शाम महके तेरे तसव्वुर से,
शाम के बाद फिर सहर महके,

रात भर सोचता रहा तुझ को,
ज़हन-ओ-दिल मेरे रात भर महके,

याद आए तो दिल मुनव्वर हो,
दीद हो जाए तो नज़र महके,

वो घड़ी दो घड़ी जहाँ बैठे,
वो ज़मीं महके वो शजर महके,

Lyrics: Dr. Nawaz Dewbandi
Singer: Jagjit Singh

जनवरी 16, 2007

ये जो ज़िन्दगी की किताब है


ये जो ज़िन्दगी की किताब है, ये किताब भी क्या खिताब है,
कहीं एक हसीं सा ख्वाब है, कही जान-लेवा अज़ाब है,

कहीं छांव है, कहीं धूप है, कहीं और ही कोई रूप है,
कई चेहरे हैं इसमे छिपे हुये, एक अजीब सा ये निकाब है,

कहीं खो दिया कहीं पा लिया, कहीं रो लिया कहीं गा लिया,
कहीं छीन लेती है हर खुशी, कहीं मेहरबान ला-ज़वाब है,

कहीं आंसू की है दास्तान, कहीं मुस्कुराहटों का है बयान,
कहीं बरकतों की हैं बारिशें, कहीं तिशनगी बेहिसाब है,

Lyrics: Rajesh Reddy
Singer: Jagjit Singh

नवम्बर 2, 2006

याद नहीं क्या क्या देखा था


याद नहीं क्या क्या देखा था सारे मंज़र भूल गये,
उसकी गलियों से जब लौटे अपना भी घर भूल गये,

ख़ूब गये परदेस कि अपने दीवार-ओ-दर भूल गये,
शीशमहल ने ऐसा घेरा मिट्टी के घर भूल गये,

तुझको भी जब अपनी क़समें अपने वादे याद नहीं,
हम भी अपने ख़्वाब तेरी आँखों में रखकर भूल गये,

मुझको जिन्होने क़त्ल किया है कोई उन्हे बतलाये ”नज़ीर”,
मेरी लाश के पहलू में वो अपना ख़न्जर भूल गये,

Lyrics: Nazir Bakri
Singer: Jagjit Singh

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