कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

सितम्बर 17, 2007

फिर से मौसम बहारों का आने को है

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 5:32 अपराह्न

फिर से मौसम बहारों का आने को है,
फिर से रंगीन ज़माना बदल जायेगा,
अबकी बज़्म चरागों सजा लेंगे हम,
ये भी अरमान दिल का निकल जायेगा,

आप करदे जो मुझको निगाहें करम,
मेरी उल्फत का रह जायेगा कुछ भरम,
यूं फ़साना तो मेरा रहेगा यही,
सिर्फ़ उनवान उसका बदल जायेगा,

फीकी फीकी सी क्यूँ शाम-ऐ-मएखाना है,
लुत्फ़ साकी भी कम खाली पैमाना है,
अपनी नज़रों से ही कुछ पिला दी जिए,
रंग महफिल का ख़ुद ही बदल जायेगा,

मेरे मिटने का उनको ज़रा गम नहीं,
जुल्फ भी उनकी ऐ दोस्त वार हम नहीं,
अपने होने न होने से होता है क्या,
काम दुनिया का यु ही तो चल जायेगा,

आपने दिल जो ज़ाहिद का तोडा तो क्या,
आपने उसकी दुनिया को छोड़ा तो क्या,
आप इतने तो आख़िर परेशान न हों,
वो संभलते संभलते संभल जायेगा,

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सितम्बर 15, 2007

तेरे निसार सकिया

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 7:20 अपराह्न

तेरे निसार सकिया जितनी पीयू पिलाए जा,
मस्त नज़र का वास्ता मस्त मुझे बनाए जा,

तुझको किसी से मर्ज़ क्या बिजली कहीं गिराए जा,
दिल जले या जिगर जले तू यूं ही मुस्कुराये जा,

सामने मेरे आ के देख रुख से नकाब हटा के देख,
खिलमन-ऐ-दिल है मुन्तज़िर बर्के नज़र गिराए जा,

वफ़ा-ऐ-बदनसीब को बख्शा है तुने दर्द जो,
है कोई इसकी भी दावा इतना ज़रा बताये जा,

सितम्बर 13, 2007

सर झुकाओगे तो

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 4:15 अपराह्न

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जायेगा,
इतना मत चाहो उसे वो बेवफा हो जायेगा,

हम भी दरिया हैं हमे अपना हुनर मालूम है,
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा,

मैं खुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तों,
ज़हर भी इसमे अगर होगा दवा हो जायेगा,

रूठ जाना तो मोहब्बत की अलामत है मगर,
क्या ख़बर थी मुझसे वो इतना खफा हो जायेगा,

न कह साकी बहार आने के दिन हैं

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 1:31 अपराह्न

न कह साकी बहार आने के दिन हैं,
जिगर के दाग छिल जाने के दिन हैं,

अदा से खूब अदा आने के दिन हैं,
अभी तो दूर शर्माने के दिन हैं,

गरेबान ढूँढ़ते हैं हाथ मेरे,
चमन में फूल खिल जाने के दिन हैं,

तुम्हे राज़-ऐ-मोहब्बत क्या बताएं,
तुम्हारे खेलने खाने के दिन हैं,

घटाएं ऊंदी ऊंदी कह रही है,
मए अंगूर खिच्वाने के दिन हैं,

सितम्बर 12, 2007

कुछ न कुछ तो ज़रूर होना है

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 6:30 अपराह्न

कुछ न कुछ तो ज़रूर होना है,
सामना आज उनसे होना है,

तोड़ो फैको रखो करो कुछ भी,
दिल हमारा है क्या खिलौना है,

जिन्दगी और मौत का मतलब,
तुमको पाना है तुमको खोना है,

इतना डरना भी क्या है दुनिया से,
जो भी होना है वोह तो होना है,

उठ के महफिल से मत चले जाना,
तुमसे रोशन यह कोना कोना है,

कोई दोस्त है न रकीब है

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Non Films,Visions — Amarjeet Singh @ 6:13 अपराह्न

कोई दोस्त है न रकीब है,
तेरा शहर कितना अजीब है,

वो जो इश्क था वो जूनून था,
ये जो हिजर है ये नसीब है,

यहाँ किसका चेहरा पढ़ा करूँ,
यहाँ कौन इतना क़रीब है,

मैं किसे कहूं मेरे साथ चल,
यहाँ सब के सर पे सलीब है,

कौन आया

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 5:56 अपराह्न

कौन आया रास्ते आइना खाना हो गए,
रात रोशन हो गयी दिन भी सुहाने हो गए,

ये भी मुमकिन है के उसने मुझको पहचाना न हो,
अब उसे देखे हुए कितने जमाने हो गए,

जाओ उन कमरों के आईने उठाकर फ़ेंक दो,
वे अगर ये कह रहें हो हम पुराने हो गए,

मेरी पलकों पर ये आंसू प्यार की तौहीन है,
उनकी आंखों से गिरे मोती के दाने हो गए,

कल रात जहाँ मैं था

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 5:38 अपराह्न

हर गोशा गुलिस्तान था कल रात जहाँ मैं था,
एक जशन -ऐ -बहारां था कल रात जहाँ मैं था,

नगमें थे हवाओं में जादू था फ़िज़ाओं मे,
हर साँस ग़ज़लफान था कल रात जहाँ मैं था,

दरिया -ऐ -मोहब्बत में कश्ती  थी जवानी की,
जज्बात का तूफान था कल रात जहाँ मैं था,

महताब था बाहों में जलवे थे निगाहों मे,
हर सिंत चरागाँ था कल रात जहाँ मैं था,

सितम्बर 11, 2007

कभी कभी यूं भी हमने अपने जीं को बहलाया है

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 6:48 अपराह्न

कभी कभी यूं भी हमने अपने जीं को बहलाया है,
जिन बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया है,

हमसे पूछो इज़्ज़त वालो की इज़्ज़त का हाल यहाँ,
हमने भी इस शहर में रहकर थोड़ा नाम कमाया है,

उस से बिछडे बरसों बीते लेकिन आज न जाने क्यूँ,
आँगन में हसते बच्चों को बेकारों धमकाया है,

कोई मिला तो हाथ मिलाया कहीं गए तो बातें की,
घर से बाहर जब भी निकले दिन भर बोझ उठाया है,

झूम के जब रिन्दो ने पिला दी

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 6:34 अपराह्न

झूम के जब रिन्दो ने पिला दी,
शेख़ ने चुपके चुपके दुआ दी,

एक कमी थी ताजमहल में,
हमने तेरी तस्वीर लगा दी,

आपने झूठा वादा करके,
आज हमारी उम्र बढ़ा दी,

तेरी गली में सजदे करके,
हमने इबादतगाह बना दी,

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