कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

मई 21, 2012

चाँद से फूल से


चाँद से फूल से या मेरी जुबां से सुनिए,
हर तरफ आप का किसा जहां से सुनिए,

सब को आता है दुनिया को सता कर जीना,
ज़िंदगी क्या मुहब्बत की दुआ से सुनिए,

मेरी आवाज़ पर्दा मेरे चहरे का,
मैं हूँ खामोश जहां मुझको वहां से सुनिए,

क्या ज़रूरी है की हर पर्दा उठाया जाए,
मेरे हालात अपने अपने मकान से सुनिए..

नवम्बर 17, 2007

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुकदर मेरा


हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुकदर मेरा,
मैं ही कश्ती हूँ मुझी मे है समंदर मेरा,

एक से हो गए मौसम्हो के चेहरे सारे,
मेरी आखो से कही खो गया मंजर मेरा,

किस से पुछु के कहा गुम हूँ कई बरसों से,
हर जगह दुन्द फिरता है मुझे घर मेरा,

मुद्दते हो गई एक खवाब सुन्हेरा देखे,
जागता रहता है हर नींद मे बिस्तर मेरा,

WordPress.com पर ब्लॉग.