कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 15, 2007

जब भी तन्हाई से घबरा के सिमट जाते हैं


जब भी तन्हाई से घबरा के सिमट जाते हैं,
हम तेरी याद के दामन से लिपट जाते हैं,

उन पे तूफान को भी अफ़सोस हुआ करता है,
वो सफिने जो किनारों पे उलट जाते हैं,

हम तो आए थे रहें साख में फूलों की तरह,
तुम अगर हार समझते हो तो हट जाते हैं,

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