कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

जनवरी 10, 2007

हम भी शराबी तुम भी शराबी


हम भी शराबी तुम भी शराबी!
छलके गुलाबी छलके गुलाबी!
तक़दीर दिल की खाना खराबी !!

जब तक है जीना खुष होके जीले
जब तक है पीना जी भर के पीले

हसरत ना कोई रह जाये बाकी !!

हम भी शराबी तुम भी शराबी….

कल सुबह के दामन में तुम होंगे ना हम होंगे,
बस रेत के सीने पर कुछ नख़्शे कदम होंगे !

बस रात भर के मेहमान हम है,
जुल्फ़ों के शब के थोडे से कम है!

बाक़ी रहेगा सागर ना साक़ी !!

हम भी शराबी तुम भी शराबी!
छलके गुलाबी छलके गुलाबी!
तक़दीर दिल की खाना खराबी !!

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