कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

सितम्बर 22, 2007

आज मैंने अपना फिर सौदा किया


आज मैंने अपना फिर सौदा किया,
और फिर में दूर से देखा किया,
जिन्दगी भर मेरे कम आए उसूल,
एक एक करके उन्हें बेचा किया,
कुछ कभी अपनी वफाओ मे भी थी,
तुमसे क्या कहते की तुमने क्या किया,
हो गई थी दिल को कुछ उम्मीद सी,
खैर तुमने जो किया अच्छा किया,

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