कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

सितम्बर 22, 2007

आप भी आए हम को भी बुलाते रहिए


आप भी आए, हम को भी बुलाते रहिए,
दोस्ती जुर्म नही, दोस्त बनाते रहिए,
ज़हर पी जाए और बाटिये अमृत सबको,
जख्म भी खाए और गीत भी गाते रहिए,
वक्त ने लुट ली लोगो की तमन्नाए भी,
खवाब जो देखिये औरों को दिखाते रहिए,
शक्ल तो आपके भी ज़हन मे होगी कोई,
कभी बन जायेगी तस्वीर, बनते रहिए,

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