कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

मई 13, 2012

देखा जो आइना तो मुझे सोचना पड़ा


देखा जो आइना तो मुझे सोचना पड़ा,
खुद से न मिल सका तो मुझे सोचना पड़ा,

उसका जो ख़त मिला तो मुझे सोचना पड़ा,
अपना सा वो लगा तो मुझे सोचना पड़ा,

मुझको था गुमान के मुझी में है एक अना,
देखा तेरी अना तो मुझे सोचना पड़ा,

दुनिया समझ रही थी के नाराज़ मुझसे है,
लेकिन वो जब मिला तो मुझे सोचना पड़ा,

इक दिन वो मेरे ऐब गिनाने लगा करार,
जब खुद ही थक गया तो मुझे सोचना पड़ा..

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