कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 2, 2007

एक परवाज़ दिखाई दी है


एक परवाज़ दिखाई दी है,
तेरी आवाज़ सुनाई दी है,

जिस की आँखों में कटी थीं सदियां,
उस ने सदियों की जुदाई दी है,

सिर्फ़ एक सफ़हा पलटकर् उस ने,
बीती बातों की सफ़ाई दी है,

फिर वहीं लौट के जाना होगा,
यार ने कैसी रिहाई दी है,

आग ने क्या क्या जलाया है शव पर,
कितनी ख़ुश-रंग दिखाई दी है,

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