कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 1, 2007

श्याम नाम रस बरसे रे मनवा


श्याम नाम रस बरसे रे मनवा,
श्याम नाम रस बरसे ||
सावन भादो जस हिरयाली,
तस् हिरयाली तन में |
जस बसंत में फुलवा खिलते,
तस फुलवारी मन में ||
निरख -निरख प्रभु श्याम छबि को,
मनवा मोरा हरषे ||१||

श्याम नाम में मन अस भीज़ा,
नदिया तट हो जैसे |
श्याम बिना है जीवन ऐसो ,
जल बिन मीन हो वेसे |
‘दास नारायण’ प्रभु चरनन को,
बार-बार मन तरसे ||२||

सितम्बर 28, 2007

पतित पवन नाम तीहारो


पतित पवन नाम तीहारो,
मुझको पावन कर दो |
पतझड़ जैसा जीवन मेरा,
उसको सावन कर दो |

चरण पड़ा हूँ विनती सुन लो,
पाप-ताप को हरना!
श्रद्धा तुम पर मेरी प्रभु जी
मान हमारा रखना |
कुलषित तन मन निर्मल होवे ,
ऐसा मुझको वर दो ||

पतित हुए हैं करम हमारे ,
अपना मुझे बना लो |
करे याचना ‘दास नारायण ‘
मुझको तुम अपना लो !
हे ! रघुनन्दन – बनो सहायक
मन में आनंद भर दो ||

सितम्बर 22, 2007

श्याम चरण मन भाये


श्याम चरण मन भाये |
उठत-बैठत जागत-सोवत,
हरि छबि सदा सुहाये |
इत-उत- पल-पल छिन-छिन देखूँ,
चंद्र रूप मुस्काये |
बंद करूँ जो अंखियन आपन,
हिय नैनन दरषाये ||१||

अंग-अंग ते रोम-रोम में,
श्यामल छबि हरषाये |
‘दास नारायण’ जनम सुफल भयो,
दोउ लोक बन जाये ||२||

वर्डप्रेस (WordPress.com) पर एक स्वतंत्र वेबसाइट या ब्लॉग बनाएँ .