कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 1, 2007

चराग-ए-इश्क जलाने की रात आयी है


चराग-ए-इश्क, जलाने की रात आयी है,
किसी को अपना बनाने की रात आयी है,

वो आज आये है महफ़िल में चांदनी लेकर,
के रोशनी में नहाने की रात आयी है,

फ़लक का चांद भी शर्मा के मुँह छुपायेगा,
नकाब रुख से उठा ने की रात आयी है,

निगाहें साकी से पेहम के छलक रही है शराब,
पियो के पीने पीलाने की रात आयी है,

Lyrics: Faiz Ratlami
Singer: Jagjit Singh

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