कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 23, 2007

गुलशन की फ़क़त फूलों से नहीं काटों से भी जीनत होती है


गुलशन की फ़क़त फूलों से नहीं काटों से भी जीनत होती है,
जीने के लिए इस दुनिया मे गम की भी ज़रूरत होती है,

ऐ वाइज़-ऐ-नादान करता है तू एक क़यामत का चर्चा,
यहाँ रोज़ निगाहें मिलती हैं यहाँ रोज़ क़यामत होती है,

वो पुर्सिश-ऐ-गम को आये हैं कुछ कह न सकूं चुप रह न सकूं,
खामोश रहूँ तो मुश्किल है कह दू तो शिकायत होती है,

करना ही पड़ेगा जब्त-ऐ-आलम पीने ही पड़ेंगे ये आंसू,
फरियाद-ओ-फुगान से ऐ नादाँ तौहीन-ऐ-मोहब्बत होती है,

जो आके रुके दामन पे सदा वो अश्क नहीं है पानी है,
जो अश्क न छलके आंखों से उस अश्क की कीमत होती है,

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