कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 27, 2007

गुम सुम ये जहाँ है


गुम सुम ये जहाँ है, हमदम तू कहाँ है,
गम्ज़दा हो गई, ज़िंदगी आ भी जा,

रात बैठी है बाहे पसारे, सिस्किया ले रहे है सितारे,
कोई टुटा हुआ दिल पुकारे, हमदम तू कहाँ है,

आज आने का वादा भुला कर, नाउमीदी की आंधी चला कर,
आशियाना वफ़ा का जला कर, हमदम तू कहाँ है,

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