कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 30, 2006

है लौ ज़िंदगी


है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
मगर इस पे जलने का दस्तूर
है लौ ज़िंदगी

कभी सामने आता मिलने उसे
बड़ा नाम् उसका है मशहूर है

है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
मगर इस पे जलने का दस्तूर
है लौ ज़िंदगी

भवर पास है चल पहन ले इसे
किनारे का फदा बहुत दूर है

है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
मगर इस पे जलने का दस्तूर
है लौ ज़िंदगी

सुना है वो ही करने वाला है सब
सुना है के इंसान मज़बूर है

है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
मगर इस पे जलने का दस्तूर
है लौ ज़िंदगी

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