कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 6, 2007

जहाँ जहाँ मुझे सेहरा दिखायी देता है


जहाँ जहाँ मुझे सेहरा दिखायी देता है,
मेरी तरह से अकेला दिखायी देता है,

यह एक अब्र का टुकडा कहाँ कहाँ बरसे,
तमाम दस्त ही प्यासा दिखायी देता है,

यह किस मकाम पे लाई है जुस्तजू तेरी,
जहाँ से अर्श भी नीचा दिखायी देता है..

WordPress.com पर ब्लॉग.