कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 12, 2007

ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा


ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा

अलविदा ऐ सरज़मीन-ए-सुबह-ए-खन्दां अलविदा
अलविदा ऐ किशवर-ए-शेर-ओ-शबिस्तां अलविदा
अलविदा ऐ जलवागाहे हुस्न-ए-जानां अलविदा
तेरे घर से एक ज़िन्दा लाश उठ जाने को है
आ गले मिल लें कि आवाज़-ए-जरस आने को है

ऐ मलीहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा

हाय क्या क्या नेमतें मिली थीं मुझ को बेबहा
यह खामोशी यह खुले मैदान यह ठन्डी हवा
वाए, यह जां बख्श गुस्तां हाए रंगीं फ़िज़ा
मर के भी इनको न भूलेगा दिल-ए-दर्द आशना
मस्त कोयल जब दकन की वादियों में गायेगी
यह सुबुक छांव बगूलों की बहुत याद आएगी

ऐ मलीहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा

कल से कौन इस बाग़ को रंगीं बनाने आएगा
कौन फूलों की हंसी पर मुस्कुराने आएगा
कौन इस सब्ज़े को सोते से जगाने आएगा
कौन इन पौधों को सीने से लगाने आयेगा
कौन जागेगा क़मर के नाज़ उठाने के लिये
चांदनी रात को ज़ानों पर सुलाने के लिये

ऐ मलीहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा

आम के बाग़ों में जब बरसात होगी पुरखरोश
मेरी फ़ुरक़त में लहू रोएगी चश्म-ए-मैफ़रोश
रस की बूंदें जब उडा देंगी गुलिस्तानों के होश
कुन्ज-ए-रंगीं में पुकारेंगी हवाएं ‘जोश जोश’
सुन के मेरा नाम मौसम ग़मज़दा हो जाएगा
एक महशर सा गुलिस्तां में बपा हो जाएगा

ऐ मलीहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा

आ गले मिल लें खुदा हाफ़िज़ गुलिस्तान-ए-वतन
ऐ अमानीगंज के मैदान ऐ जान-ए-वतन
अलविदा ऐ लालाज़ार-ओ-सुम्बुलिस्तान-ए-वतन
अस्सलाम ऐ सोह्बत-ए-रंगीं-ए-यारान-ए-वतन
हश्र तक रहने न देना तुम दकन की खाक में
दफ़न करना अपने शायर को वतन की खाक में

ऐ मलीहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा

Lyrics: Josh Malihabadi
Singer: Jagjit Singh

दिसम्बर 8, 2007

तुझ से रुख़सत की वो


तुझ से रुख़सत की वो शाम-ए-अश्क़-अफ़्शां हाए हाए,
वो उदासी वो फ़िज़ा-ए-गिरिया सामां हाए हाए,

यां कफ़-ए-पा चूम लेने की भिंची सी आरज़ू,
वां बगल-गीरी का शरमाया सा अरमां हाए हाए,

वो मेरे होंठों पे कुछ कहने की हसरत वाये शौक़,
वो तेरी आँखों में कुछ सुनने का अरमां हाए हाए,

Lyrics: Josh Malihabadi
Singer: Jagjit Singh

दिसम्बर 6, 2007

किस को आती है मसीहाई


किस को आती है मसीहाई किसे आवाज़ दूं,
बोल ऐ ख़ूंख़ार तनहाई किसे आवाज़ दूं,

चुप रहूं तो हर नफ़स ड़सता है नागन की तरह,
आह भरने में है रुसवाई किसे आवाज़ दूं,

उफ़ ख़ामोशी की ये आहें दिल को बरमाती हुईं,
उफ़ ये सन्नाटे की शहनाई किसे आवाज़ दूं,

Lyrics: Josh Malihabadi
Singer: Jagjit Singh

बोल इकतारे झन झन


बोल इकतारे झन झन झन झन,

काहकशां है मेरी सुंदन,
शाम की सुर्ख़ी मेरा कुंदन,
नूर का तड़का मेरी चिलमन,
तोड़ चुका हूं सारे बंधन,
पूरब पच्छम उत्तर दक्खन,
बोल इकतारे झन झन झन झन,

मेरे तन में गुलशन सबके,
मेरे मन में जोबन सबके,
मेरे घट में साजन सबके,
मेरी सूरत दर्शन सबके,
सबकी सूरत मेरा दर्शन,
बोल इकतारे झन झन झन झन,

सब की झोली मेरी खोली,
सब की टोली मेरी टोली,
सब की होली मेरी होली,
सब की बोली मेरी बोली,
सब का जीवन मेरा जीवन,
बोल इकतारे झन झन झन झन,

सब के काजल मेरे पारे,
सब की आँखें मेरे तारे,
सब की साँसें मेरे धारे,
सारे इंसां मेरे प्यारे,
सारी धरती मेरा आंगन,
बोल इकतारे झन झन झन झन,

Lyrics: Josh Malihabadi
Singer: Jagjit Singh

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