कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 6, 2007

अब तो उठ सकता नहीं


अब तो उठ सकता नहीं आंखों से बार-ए-इन्तज़ार,
किस तरह काटे कोई लैल-ओ-नहार-ए-इन्तज़ार,

उन की उल्फ़त का यक़ीं हो उन् के आने की उम्मीद,
हों ये दोनों सूरतें तब है बहार-ए-इन्तज़ार,

मेरी आहें नारासा मेरी दुआऐं नाक़ुबूल,
या इलाही क्या करूं मै शर्मसार-ए-इन्तज़ार,

उन के ख़त की आराज़ू है उन के आमद का ख़याल,
किस क़दर फैला हुआ है कारोबार-ए-इन्तज़ार,

Lyrics: Hasrat Mohani
Singer: Chitra Singh

नवम्बर 30, 2007

तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई


तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई वो सई-ए-क़रम फ़रमा भी गये,
उस सई-ए-क़रम का क्या कहिये बहला भी गये तड़पा भी गये,

एक अर्ज़-ए-वफ़ा भी कर न सके कुछ कह न सके कुछ सुन न सके,
यहां हम ने ज़बां ही खोले थी वहां आंख झुकी शरमा भी गये,

आशुफ़्तगी-ए-वहशत की क़सम हैरत की क़सम हसरत की क़सम,
अब आप कहे कुछ या न कहे हम राज़-ए-तबस्सुम पा भी गये,

रूदाद-ए-ग़म-ए-उल्फ़त उन से हम क्या कहते क्योंकर कहते,
एक हर्फ़ न निकला होठों से और आंख में आंसू आ भी गये,

अरबाब-ए-जुनूं पे फ़ुर्कत में अब क्या कहिये क्या क्या गुज़रा,
आये थे सवाद-ए-उल्फ़त में कुछ खो भी गये कुछ पा भी गये,

ये रन्ग-ए-बहार-ए-आलम है क्या फ़िक़्र है तुझ को ऐ साक़ी,
महफ़िल तो तेरी सूनी न हुई कुछ उठ भी गये कुछ आ भी गये,

इस महफ़िल-ए-कैफ़-ओ-मस्ती में इस अन्जुमन-ए-इरफ़ानी में,
सब जाम-ब-कफ़ बैठे रहे हम पी भी गये छलका भी गये,

Lyrics: Majaaz
Singer: Jagjit Singh

नवम्बर 1, 2006

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है


चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है

बाहज़ारां इज़्तिराब-ओ-सदहज़ारां इश्तियाक
तुझसे वो पहले पहल दिल का लगाना याद है

(बाहज़ारां == thousand times, इज़्तिराब == anxiety, सदहज़ारां == once / ek baar, इश्तियाक == meeting)

तुझसे मिलते ही वो कुछ बेबाक हो जाना मेरा
और तेरा दाँतों में वो उँगली दबाना याद है

(बेबाक = outspoken)

खींच लेना वो मेरा पर्दे का कोना दफ़्फ़ातन
और दुपट्टे से तेरा वो मुँह छिपाना याद है

(दफ़्फ़ातन == suddenly)

जानकर सोता तुझे वो क़सा-ए-पाबोसी मेरा
और तेरा ठुकरा के सर वो मुस्कुराना याद है

(क़सा-ए-पाबोसी = attempt to kiss the feet)

तुझ को जब तन्हा कभी पाना तो अज़राह-ए-लिहाज़
हाल-ए-दिल बातों ही बातों में जताना याद है

(अज़्राह-ए-लिहाज़् == with caution)

जब सिवा मेरे तुम्हारा कोई दीवाना ना था
सच कहो क्या तुम को भी वो कारखाना याद है

(कारखाना == age / time)

ग़ैर की नज़रों से बचकर सब की मर्ज़ी के ख़िलाफ़
वो तेरा चोरीछिपे रातों को आना याद है

आ गया गर वस्ल की शब भी कहीं ज़िक्र-ए-फ़िराक़
वो तेरा रो-रो के मुझको भी रुलाना याद है

(वस्ल == date / meeting, ज़िक्र-ए-फ़िराक़ == mention of seperation)

दोपहर की धूप में मेरे बुलाने के लिये
वो तेरा कोठे पे नंगे पाँव आना याद है

(कोठे पे == on the terrace)

देखना मुझको जो बर्गश्ता तो सौ सौ नाज़ से
जब मना लेना तो फिर ख़ुद रूठ जाना याद है

(बर्गश्ता = रूठा हुआ)

चोरी चोरी हम से तुम आकर मिले थे जिस जगह
मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है

बेरुख़ी के साथ सुनाना दर्द-ए-दिल की दास्तां
और तेरा हाथों में वो कंगन घुमाना याद है

वक़्त-ए-रुख़सत अलविदा का लफ़्ज़ कहने के लिये
वो तेरे सूखे लबों का थरथराना याद है

बावजूद-ए-इद्दा-ए-इत्तक़ा ‘हसरत’ मुझे
आज तक अहद-ए-हवस का ये फ़साना याद है

(बावजूद = Inspite of, इद्दा-ए-इत्तक़ा = vow of piety, अहद-ए-हवस = sensuous days)

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