कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 22, 2007

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है


पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है,
जाने ना जाने गुल ही ना जाने बाग़ तो सारा जाने है,

चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं,
वर्ना दिलबर-ए-नादां भी इस दर्द का चारा जाने है,

मेहर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इन में नहीं,
और तो सब कुछ तन्ज़-ओ-कनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है,

Lyrics: Meer Taqi ‘Meer’
Singer: Jagjit Singh

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