कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

सितम्बर 22, 2007

शाम होने को है


शाम होने को है,
लाल सूरज समंदर में खोने को है,
और उसके परे कुछ परिंदे कतार बनाये,
उन्ही जंगलों को चले,
जिनके पेडों की शाखों पे है घोसले,
यह परिंदे वही लौट कर जायेगे,
और सो जायेगे,
हम ही हैरान है, इस मकानों के जंगलों में,
आपना कोई भी ठिकाना नही,
शाम होने को है,
हम कहाँ जायेगे,

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