कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 22, 2007

धुंआ उठा था दीवाने के जलते घर से


धुंआ उठा था दीवाने के जलते घर से सारी रात,
लेकिन वो ख़ामोश रहे दुनिया के ड़र से सारी रात,

रात यूँ जलते दिल पर तेरी यादों की बरासात हुई,
जैसे इक प्यासे की चिता पर बरखा बरसे सारी रात,

सारी रात तो सपने देखे सुबह को ये महसूस हुआ,
हम ने अपना सर टकराया इक पत्थर से सारी रात,

Lyrics: Shamim Shahabadi
Singer: Jagjit Singh

साक़िया होश कहाँ था


आँख को जाम समझ बैठा था अंजाने में,
साक़िया होश कहाँ था तेरे दीवाने में,

जाने किस बात की उनको है शिकायत मुझसे,
नाम तक जिनका नहीं है मेरे अफ़साने में,

दिल के टुकड़ों से तेरी याद की खुशबू ना गई,
बू-ए-मै बाकी है टूटे हुए पैमाने में,

दिल-ए-बरबाद में उम्मीद का आलम क्या है,
टिमटिमाती हुई इक शम्मा है वीराने में,

Lyrics: Shamim Shahabadi
Singer: Jagjit Singh
Music: C K Chauhan

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