कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

मार्च 21, 2008

ऐसी आंखें नही देखी


ऐसी आंखें नही देखी, ऐसा काजल नही देखा,
ऐसा जलवा नही देखा, ऐसा चेहरा नही देखा,

जब ये दामन की हवा ने, आग जंगल में लगा दे,
जब ये शहरो में जाए, रेत में फूल खिलाये,

ऐसी दुनिया नही देखी, ऐसा मंजर नही देखा,
ऐसा आलम नही देखा, ऐसा दिलबर नही देखा,

उस के कंगन का खड़कना, जैसा बुल-बुल का चहकना,
उस की पाजेब की छम-छम, जैसे बरसात का मौसम,

ऐसा सावन नही देखा, ऐसी बारिश नही देखी,
ऐसी रिम-झिम नही देखी, ऐसी खवाइश नही देखी,

उस की बेवक्त की बाते, जैसे सर्दी की हो राते,
उफ़ ये तन्हाई, ये मस्ती, जैसे तूफान में कश्ती,

मीठी कोयल सी है बोली, जैसे गीतों की रंगोली,
सुर्ख गालों पर पसीना, जैसे फागुन का महीना,

Singer: Jagjit Singh

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फ़रवरी 16, 2008

ये हिंदुस्तान है


जिसे लोग कहते है हिंदुस्तान है,
यही अपने खावाबो का प्यारा जहान है,
कई मज्हबो का यहा एक निशान है,
ये हिंदुस्तान है, ये हिंदुस्तान है,

हर एक दिल मे मिटटी की खुशबु बसी है,
ख्यालो मे हर एक के मेहँदी रची है,
अंधेरे उजाले मे ये ज़िंदगी है,
मगर प्यार ही प्यार की रोशनी है,
हमारी मोहब्बत का ये आशियाँ है,
ये हिंदुस्तान है, ये हिंदुस्तान है,

अंधेरो मे जो आज भटके हुए है,
हमारे ही भाई है बहके हुए है,
सही रास्ता उनको दिखलायेंगे हम,
लगायेंगे सिने से समझायेंगे हम,
हमारा चलन तो बड़ा मेहरबान है,
ये हिंदुस्तान है, ये हिंदुस्तान है,

Singer: Jagjit Singh

दिसम्बर 1, 2007

तुमने दिल की बात कह दी


तुमने दिल की बात कह दी, आज ये अच्छा हुआ,
हम तुम्हें अपना समझते थे, बढा धोखा हुआ,

जब भी हमने कुछ कहा, उसका असर उल्टा हुआ,
आप शायद भूलते है, बारहा ऎसा हुआ,

आपकी आंखों में ये आंसू कहाँ से आ गये,
हम तो दिवाने है लेकिन आप को ये क्या हुआ,

अब किसी से क्या कहें इकबाल अपनी दास्तां,
बस खुदा का शुक्र है जो भी हुआ अच्छा हुआ,

Lyrics: Iqbaal Azim
Singer: Jagjit Singh

तेरे बारें में जब सोचा नहीं था


तेरे बारें में जब सोचा नहीं था,
मैं तन्हा था मगर इतना नहीं था,

तेरी तस्वीर से करता था बातें,
मेरे कमरे में आईना नहीं था,

समन्दर ने मुझे प्यासा ही रखा,
मैं जब सहरा में था प्यासा नहीं था,

मनाने रुठने के खेल में,
बिछड जायेगे हम ये सोचा नहीं था,

सुना है बन्द करली उसने आँखे,
कई रातों से वो सोया नहीं था,

Lyrics: Meraz
Singer: Jagjit Singh

मुझे होश नहीं


मुझे होश नहीं, मुझे होश नहीं,
कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं,
रात के साथ गयी बात , मुझे होश नहीं,

मुझको ये भी नहीं मालुम के जाना है कहाँ,
थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं,

जाने क्या टुटा है पैमाना के दिल है मेरा,
बिखरे बिखरे है ख्यालात मुझे होश नहीं,

आंसुओं और शराबो मे गुजर है अब तो,
मैने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं,

Lyrics: Rahat Indori
Singer: Jagjit Singh

चराग-ए-इश्क जलाने की रात आयी है


चराग-ए-इश्क, जलाने की रात आयी है,
किसी को अपना बनाने की रात आयी है,

वो आज आये है महफ़िल में चांदनी लेकर,
के रोशनी में नहाने की रात आयी है,

फ़लक का चांद भी शर्मा के मुँह छुपायेगा,
नकाब रुख से उठा ने की रात आयी है,

निगाहें साकी से पेहम के छलक रही है शराब,
पियो के पीने पीलाने की रात आयी है,

Lyrics: Faiz Ratlami
Singer: Jagjit Singh

नवम्बर 20, 2007

तुम हमारे नही तो क्या गम है


तुम हमारे नही तो क्या गम है,
हम तुम्हारे तो है यह क्या कम है,
हुस्न की शोखिया ज़रा देखो,
गाहे शोला है गाहे शबनम है,
मुस्कुरा दो ज़रा खुदा के लिए,
शम-ऐ-मफिल में रौशनी कम है,
बन गया है यह ज़िंदगी अब तो,
तुझ से बढकर हमे तेरा गम है,

फूल भरे है दामन दामन


फूल भरे है दामन दामन,
लेकिन वीरान गुलशन गुलशन,
अक्ल की बातें करने वाले,
क्या समझेगे दिल की धड़कन,
कौन किसी के दुःख का साथी,
आपने आसू अपना दामन,
तेरा दामन छोडू कैसे,
मेरी दुनिया तेरा दामन,

आखो से यूं आंसू


आखो से यूं आंसू ढलके,
सागर से जैसे मए छलके
हम समझे मफ्हुम-ऐ-भरा,
कोई आया भेष बदल के,
काश बता सकते परवाने,
क्या खोया, क्या पाया जलके
मंजिल तक वो क्या पहुचा,
जिसने देखि राह न चलके,

उठा सुराही


उठा सुराही ले शीशा-ओ-जाम साकी,
फिर इसके बाद खुदा का भी नाम ले साकी,
फिर इसके बाद हमे तिशनगी रहे न रहे,
कुछ और देर मुरवत से काम ले साकी,
फिर इसके बाद जो होगा वो देखा जाएगा,
अभी तो पीने पिलाने से काम ले साकी,
तेरे हजूर में होश-ओ-खिरद से क्या हासिल,
नही है मए तो निगाहों से काम ले साकी,

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