कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 8, 2007

तुझ से रुख़सत की वो


तुझ से रुख़सत की वो शाम-ए-अश्क़-अफ़्शां हाए हाए,
वो उदासी वो फ़िज़ा-ए-गिरिया सामां हाए हाए,

यां कफ़-ए-पा चूम लेने की भिंची सी आरज़ू,
वां बगल-गीरी का शरमाया सा अरमां हाए हाए,

वो मेरे होंठों पे कुछ कहने की हसरत वाये शौक़,
वो तेरी आँखों में कुछ सुनने का अरमां हाए हाए,

Lyrics: Josh Malihabadi
Singer: Jagjit Singh

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