कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 20, 2007

उठा सुराही


उठा सुराही ले शीशा-ओ-जाम साकी,
फिर इसके बाद खुदा का भी नाम ले साकी,
फिर इसके बाद हमे तिशनगी रहे न रहे,
कुछ और देर मुरवत से काम ले साकी,
फिर इसके बाद जो होगा वो देखा जाएगा,
अभी तो पीने पिलाने से काम ले साकी,
तेरे हजूर में होश-ओ-खिरद से क्या हासिल,
नही है मए तो निगाहों से काम ले साकी,

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