कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 27, 2007

यूँ तो जाते हुए मैंने उसे रोका भी नही


यूँ तो जाते हुए मैंने उसे रोका भी नही,
प्यार उस से न रहा हो मुझे, ऐसा भी नही,

मुझको मंजिल की कोई फ़िक्र नही है य रब,
पर भटकता ही रहू जिस पे, वो रास्ता भी नही,

मुन्तजिर मे भी किसी शाम नही था उसका,
और वादे पे कभी शख्स वो आया भी नही,

जिसकी आहट पे निकल पड़ता था कल सीने से,
देख कर आज उसे दिल मेरा धड़का भी नही,

जवाब जिनका नही वो सवाल होते है


जवाब जिनका नही वो सवाल होते है,
जो देखने में नही कुछ, कमाल होते है,

तराश्ता हूँ तुझे जिन में अपने लफ्जों से,
बहुत हसीन मेरे वो ख्याल होते है,

हसीन होती है जितनी बला की दो आँखें,
उसी बला के उन आंखों में जाल होते हैं,

वह गुनगुनाते हुए, यूँही, जो उठाते है,
क़दम कहाँ, वो क़यामत की चाल होते हैं,

अक्टूबर 25, 2007

बोलो राम जय जय राम


बोलो राम जय जय राम,
मुनिमन रंजन भव भये भंजन,
असुर निकंदन सीता राम,
पतित उद्धारण जग जन तारण,
नित्ये निरंजन सीता राम,
दशरत नंदन सुर मुनि वंदन,
परेय्पप वंदन सीता राम,
जग सुख कारण जग जन पालन,
संतन जीवन सीता राम,
सत्ये सनातन मंगल कारन,
सगुण निरंजन सीता राम,
राम ही पावन अति मन भावन,
नर नारायण सीता राम,

जय रघुनन्दन जय सिया राम


जय रघुनन्दन जय सिया राम,
भज मन प्यारे जय सिया राम,
आदि राम अनंत है राम,
सत चित और अनंत है राम,
हनुमान के स्वामी राम,
दीनन के दुःख हारी राम,
मर्यादा पुर्शोतम राम,
पुरान ब्रम्ह सनातन राम,
तुलसी सुत तुलसी के राम,
करुना कर भक्तो के राम,
जय सिया राम जय जय सिया राम,

जन्म सफल होगा बन्दे


बोलो राम जय जय राम,
जन्म सफल होगा बन्दे,
मन में राम बसा ले,
हे राम नाम के मोती को,
सांसो की माला बना ले,
राम पतित पवन करुनाकर,
और सदा सुख दाता,
सरस सुहावन अति मनभावन,
राम से प्रीत लगा ले,
मन में राम बसा ले,
मोह माया है झूटा बन्धन,
त्याग उसे तू प्राणी,
राम नाम की ज्योत जला कर,
अपना भाग जगा ले,
मन में राम बसा ले,
राम भजन में डूब के अपनी,
निर्मल कर ले काया,
राम नाम से प्रीत लगा के,
जीवन पर लगा ले,

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