कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 30, 2007

यूं तो गुज़र रहा है हर इक पल खुशी के साथ


यूं तो गुज़र रहा है, हर इक पल खुशी के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है, क्यों ज़िंदगी के साथ,

रिश्ते वफाये दोस्ती, सब कुछ तो पास है,
क्या बात है पता नही, दिल क्यों उदास है,
हर लम्हा है हसीन, नई दिलकशी के साथ,

चाहत भी है सुकून भी है दिल्बरी भी है,
आखों में खवाब भी है, लबो पर हसी भी है,
दिल को नही है कोई, शिकायत किसी के साथ,

सोचा था जैसा वैसा ही जीवन तो है मगर,
अब और किस तलाश में बैचैन है नज़र,
कुदरत तो मेहरबान है, दरयादिली के साथ,

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