कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 25, 2007

वो कौन है दुनिया में जिसे गम नहीं होता


वो कौन है, दुनिया में जिसे, गम नहीं होता,
किस घर में खुशी होती है, मातम नहीं होता,

ऐसे भी हैं, दुनिया में जिन्हें, गम नहीं होता,
एक गम हैं हमारा, जो कभी कम नहीं होता,

क्या सुरमा भरी, आंखों से, आंसू नहीं गिरते,
क्या मेहंदी लगे, हाथों से, मातम नहीं होता,

कुछ और भी, होती है, बिगाड़ने की अदाएं,
बनने मी सवारने मे, ये आलम नहीं होता,

अक्टूबर 19, 2007

तुम ये कैसे जुदा हो गए


तुम ये कैसे जुदा हो गए,
हर तरफ़ हर जगह हो गए,

अपना चेहरा न बदला गया,
आईने से खफा हो गए,

जाने वाले गए भी कहाँ,
चाँद सूरज घटा हो गए,

बेवफा तो न वो थे न हम,
यूं हुआ बस जुदा हो गए,

आदमी बनना आसान न था,
शेख जी आरसा हो गए,

चाक जिगर के सी लेते हैं


चाक जिगर के सी लेते हैं,
जैसे भी हो जी लेते हैं,

दर्द मिले तो सह लेते हैं,
अश्क मिले तो पी लेते हैं,

आप कहें तो मर जाएं हम,
आप कहें तो जी लेते हैं,

बेजारी के अंधीयारे में,
जीने वाले जी लेते हैं,

हम तो हैं उन फूलों जैसे,
जो कांटो में जी लेते हैं,

अक्टूबर 16, 2006

आज फिर उनका सामना होगा


आज फिर उनका सामना होगा
क्या पता उसके बाद क्या होगा।

आसमान रो रहा है दो दिन से
आपने कुछ कहा-सुना होगा।

दो क़दम पर सही तेरा कूचा
ये भी सदियों का फ़सला होगा।

घर जलाता है रोशनी के लिए
कोई मुझ सा भी दिलजला होगा।

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