कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

सितम्बर 28, 2007

पतित पवन नाम तीहारो


पतित पवन नाम तीहारो,
मुझको पावन कर दो |
पतझड़ जैसा जीवन मेरा,
उसको सावन कर दो |

चरण पड़ा हूँ विनती सुन लो,
पाप-ताप को हरना!
श्रद्धा तुम पर मेरी प्रभु जी
मान हमारा रखना |
कुलषित तन मन निर्मल होवे ,
ऐसा मुझको वर दो ||

पतित हुए हैं करम हमारे ,
अपना मुझे बना लो |
करे याचना ‘दास नारायण ‘
मुझको तुम अपना लो !
हे ! रघुनन्दन – बनो सहायक
मन में आनंद भर दो ||

सितम्बर 27, 2007

मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो


मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो,
मेरी तरह तुम भी झूठे हो,

इक टहनी पर चाँद टिका था,
मैंने ये समझा तुम बैठे हो,

उजले उजले फूल खिले थे,
बिल्कुल जैसे तुम हँसते हो,

मुझ को शाम बता देती है,
तुम कैसे कपड़े पहने हो,

तुम तन्हा दुनिया से लडोगे,
बच्चों सी बातें करते हो,

Lyrics: Dr. Bashir Badr
Singer: Jagjit Singh

तेरे आने की जब ख़बर महके


तेरे आने की जब ख़बर महके,
तेरे खुश्बू से सारा घर महके,

शाम महके तेरे तसव्वुर से,
शाम के बाद फिर सहर महके,

रात भर सोचता रहा तुझ को,
ज़हन-ओ-दिल मेरे रात भर महके,

याद आए तो दिल मुनव्वर हो,
दीद हो जाए तो नज़र महके,

वो घड़ी दो घड़ी जहाँ बैठे,
वो ज़मीं महके वो शजर महके,

Lyrics: Dr. Nawaz Dewbandi
Singer: Jagjit Singh

सितम्बर 22, 2007

अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना


अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना,
सिर्फ़ एहसान जताने के लिए मत आना,
मैंने पलकों पे तमन्नाये सजा रखी है,
दिल मे उम्मीद की सौ शमे जला रखी है,
यह हसी शमे बुज़ाहाने के लिए मत आना,
प्यार की आग मे जंजीरे पिघल सकती है,
चाहने वालो की तकदिरें बदल सकती है,
तुम हो बेबस ये बताने के लिए मत आना,
अब तुम आना जो तुम्हे मुज्ह्से मोहबत है कोई,
मुज्से मिलने की अगर तुमको भी चाहत है कोई,
तुम कोई रसम निभाने के लिए मत आना,

तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हु


तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हु,
मैं तनहाई के दिन आते देख रहा हु,
आने वाले लम्हे से दिल सहमा है,
तुमको भी डरते घबराते देख रहा हु,
कब यादो का जख्म भरे कब दाग मिटे,
कितने दिन लगते है भुलाते देख रहा हु,
उसकी आखो मे भी काजल फैला है,
मैं भी मुड़ के जाते जाते देख रहा हु,

प्यास की कैसे लाये ताब कोई


प्यास की कैसे लाये ताब कोई,
नही दरिया तो हो शराब कोई,
रात बजती थी दूर शहनाई,
रोया पीकर बहुत शराब कोई,
कौन सा जाम किसे बख्शा है,
उसका रखे कहा हिसाब कोई,
फिर मैं सुनने लगा हु इस दिल की,
आने वाला है फिर अजाब कोई,

एक पल गमो का दरिया


एक पल गमो का दरिया, एक पल खुशी का दरिया,
रुकता नही कही भी, ये जिन्दगी का दरिया,
आखे थी वो किसी की या खवाब के ज़जिरे,
आवाज थी किसी की या रागिनी का दरिया,
इस दिल की वादियों मे अब खाक उड़ रही है,
बहता यही था पहले एक आशिकी का दरिया,
किरणों मे है ये लहरें, या लहरों मे है किरणे,
दरिया के चाँदनी है, या चाँदनी का दरिया,

शाम होने को है


शाम होने को है,
लाल सूरज समंदर में खोने को है,
और उसके परे कुछ परिंदे कतार बनाये,
उन्ही जंगलों को चले,
जिनके पेडों की शाखों पे है घोसले,
यह परिंदे वही लौट कर जायेगे,
और सो जायेगे,
हम ही हैरान है, इस मकानों के जंगलों में,
आपना कोई भी ठिकाना नही,
शाम होने को है,
हम कहाँ जायेगे,

क्यो डरे जिन्दगी में क्या होगा


क्यो डरे जिन्दगी में क्या होगा,
कुछ न होगा तो तज्रुबा होगा,
हस्ती आखो में झाक कर देखो,
कोई आसू कही छुपा होगा,
इन दिनों न उम्मीद सा हु मैं,
शायद उसने भी यह सुना होगा,
देखकर तुमको सोचता हु मैं,
क्या किसी ने तुम्हे छुया होगा,

आप भी आए हम को भी बुलाते रहिए


आप भी आए, हम को भी बुलाते रहिए,
दोस्ती जुर्म नही, दोस्त बनाते रहिए,
ज़हर पी जाए और बाटिये अमृत सबको,
जख्म भी खाए और गीत भी गाते रहिए,
वक्त ने लुट ली लोगो की तमन्नाए भी,
खवाब जो देखिये औरों को दिखाते रहिए,
शक्ल तो आपके भी ज़हन मे होगी कोई,
कभी बन जायेगी तस्वीर, बनते रहिए,

अगला पृष्ठ »

वर्डप्रेस (WordPress.com) पर एक स्वतंत्र वेबसाइट या ब्लॉग बनाएँ .