कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

जनवरी 11, 2008

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता


अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता
कभी जान सदक़े होती कभी दिल निछार होता

कोई फ़ितना था क़यामत ना फिर आशकार होता
तेरे दिल पे काश ज़ालिम मुझे इख़्तियार होता

जो तुम्हारी तरह तुम से कोई झूठे वादे करता
तुम्हीं मुन्सिफ़ी से कह दो तुम्हे ऐतबार होता

ग़म-ए-इश्क़ में मज़ा था जो उसे समझ के खाते
ये वो ज़हर है के आखिर मै-ए-ख़ुशगवार होता

ना मज़ा है दुश्मनी में ना ही लुत्फ़ दोस्ती में
कोई ग़ैर ग़ैर होता कोई यार यार होता

ये मज़ा था दिल्लगी का के बराबर आग लगती
ना तुझे क़रार होता ना मुझे क़रार होता

तेरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते
अगर अपनी ज़िंदगी का हमें ऐतबार होता

ये वो दर्द-ए-दिल नहीं है के हो चारासाज़ कोई
अगर एक बार मिटता तो हज़ार बार होता

गए होश तेरे ज़ाहिद जो वो चश्म-ए-मस्त देखी
मुझे क्या उलट ना देता जो ना बादाख़्वार होता

मुझे मानते सब ऐसा के उदूं भी सजदा करते
दर-ए-यार काबा बनता जो मेरा मज़ार होता

तुम्हे नाज़ हो ना क्योंकर के लिया है “दाग़” का दिल
ये रक़म ना हाथ लगती ना ये इफ़्तिख़ार होता

Unsung lines in Bold Italic

Lyrics: Daag Dehlvi
Singer: Jagjit Singh

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नवम्बर 22, 2007

शहरों शहरों आज हैं


शहरों शहरों आज हैं तन्हा दिल पर गहरा दाग़ लिये,
गलियों गलियों हो गये रुसवा दिल पर गहरा दाग़ लिये,

आज गुलिस्तां में फैली है ख़ुशबू तेरी यादों की,
मौसम-ए-गुल है हम हैं तन्हा दिल पर गहरा दाग़ लिये,

रोते-धोते जी को जलाते मंज़िल-ए-शब तक आ पहुंचे,
चेहरे पर है गर्द-ए-तमन्ना दिल पर गहरा दाग़ लिये,

ढ़ूंढ़ने उन को शहर-ए-बुतां में आज गये थे हम भी “अदीब”,
आँख में लेकर ग़म का दरिया दिल पर गहरा दाग़ लिये,

Lyrics: Krishan Adeeb
Singer: Jagjit Singh

ये किसका तसव्वुर है


ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है,
जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है,

आँखों में नमी सी है चुप-चुप से वो बैठे हैं,
नज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है,

ये इश्क़ नहीं आसां इतना तो समझ लीजे,
एक आग का दरिया है और ड़ूब के जाना है,

या वो थे ख़फ़ा हम से या हम थे ख़फ़ा उनसे,
कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है,

Lyrics: Jigar Moradabadi
Singer: Chitra Singh

वो जो हम में तुम में क़रार था


वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हे याद हो के न याद हो,
वही यानी वादा निबाह का तुम्हें याद हो के न याद हो,

वो नये गिले वो शिकायतें वो मज़े मज़े की हिकायतें,
वो हर एक बात पे रूठना तुम्हे याद हो के न याद हो,

कोई बात ऐसी अगर हुई जो तुम्हारे जी को बुरी लगी,
तो बयां से पहले ही भूलना तुम्हे याद हो के न याद हो,

जिसे आप गिनते थे आशना जिसे आप कहते थे बावफ़ा,
मै वही हूँ ‘मोमिन’-ए-मुब्तला तुम्हे याद हो के न याद हो,

Lyrics: Momin Khan ‘Momin’
Singer: Chitra Singh

फिर कुछ इस दिल को बेक़रारी है


फिर कुछ इस दिल को बेक़रारी है,
सीना ज़ोया-ए-ज़ख़्म-ए-कारी है,

फिर जिगर खोदने लगा नाख़ून,
आमद-ए-फ़स्ल-ए-लालाकारी है,

फिर उसी बेवफ़ा पे मरते हैं,
फिर वही ज़िंदगी हमारी है,

बेख़ुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’,
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है,

Lyrics: Mirza Ghalib
Singer: Jagjit Singh

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है


पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है,
जाने ना जाने गुल ही ना जाने बाग़ तो सारा जाने है,

चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं,
वर्ना दिलबर-ए-नादां भी इस दर्द का चारा जाने है,

मेहर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इन में नहीं,
और तो सब कुछ तन्ज़-ओ-कनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है,

Lyrics: Meer Taqi ‘Meer’
Singer: Jagjit Singh

ओस पड़े बहार पर


ओस पड़े बहार पर आग लगे कनार में,
तुम जो नहीं कनार में लुत्फ़ ही क्या बहार में,

उस पे करे ख़ुदा रहम गर्दिश-ए-रोज़गार में,
अपनी तलाश छोड़कर जो है तलाश-ए-यार में,

हम कहीं जानेवाले हैं दामन-ए-इश्क़ छोड़कर,
ज़ीस्त तेरे हुज़ूर में मौत तेरे दयार में,

Lyrics: Jigar Moradabadi
Singer: Chitra Singh

मुझे दे रहे हैं तसल्लियां


मुझे दे रहे हैं तसल्लियां वो हर एक ताज़ा पयाम से,
कभी आके मंज़र-ए-आम पर कभी हट के मंज़र-ए-आम से,

ना ग़रज़ किसी से ना वास्ता मुझे काम अपने ही काम से,
तेरे ज़िक्र से तेरी फ़िक्र से तेरी याद से तेरे नाम से,

मेरे साक़िया मेरे साक़िया तुझे मरहबा तुझे मरहबा,
तू पिलाये जा तू पिलाये जा इसी चश्म-ए-जाम-ब-जाम से,

तेरी सुबह-ओ-ऐश है क्या बला तुझे ऐ फ़लक जो हो हौसला,
कभी कर ले आ के मुक़ाबला ग़म-ए-हिज्र-ए-यार की शाम से,

Lyrics: Jigar Moradabadi
Singer: Jagjit Singh

कब से हूँ क्या बताऊं जहान-ए-ख़राब में


कब से हूँ क्या बताऊं जहान-ए-ख़राब में,
शब हाय हिज्र को भी रखूं गर हिसाब में,

ता फिर ना इंतज़ार में नींद आये उम्र भर,
आने का अहद कर गये आये जो ख़्वाब में,

क़ासिद के आते आते ख़त इक और लिख रखूं,
मै जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में,

Lyrics: Mirza Ghalib
Singer: Chitra Singh, Jagjit Singh

मेहरबां हो के बुला लो


मेहरबां हो के बुला लो मुझे चाहो जिस वक़्त,
मै गया वक़्त नहीं हूं के फिर आ भी ना सकूं,

ज़ौफ़ में ता नये अग़ियार का शिकवा क्या है,
बात कुछ सर तो नहीं है के उठा भी ना सकूं,

ज़हर मिलता ही नहीं मुझको सितमगर वरना,
क्या क़सम है तेरे मिलने की के खा भी ना सकूं,

Lyrics: Mirza Ghalib
Singer: Jagjit Singh, Chitra Singh

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